EVM से छेड़छाड़ का मामला गहराया जाने ई वी एम टेंप्रिंग संभव है या नहीं सबूत के साथ


EVM से छेड़छाड़ का मामला गहराया जाने ई वी एम टेंप्रिंग संभव है या नहीं सबूत के साथ

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गुजरात चुनाव का पहला चरण संपन्न हो गया लेकिन राजनीतिक मौखिक वार है कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही| EVM से छेड़छाड़ का मामला एक बार फिर रोशनी में है. और इस बार दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने नहीं बल्कि कांग्रेस के सबसे युवा होनहार नेता राहुल गांधी ने लगाया है. राहुल गांधी का कहना था कि गुजरात चुनाव के दौरान वोटिंग मशीन ब्लूटूथ डिवाइस से कनेक्ट थे.




तो जवाब है बिलकुल नहीं. ई वी एम से छेड़छाड़ करना मतलब अरनव गोस्वामी को अपने ही टीवी शो पे हराना है. या फिर आशीष नेहरा के शतक देखने बराबर है. बल्कि इलेक्शन कमिशन ने सभी राजनीतिक दलों को मशीन हैक करने की खुले आम चुनौती दी.

कुछ बातें जो साफ करतीं हैं कि हैक हो सकता है या नहीं

1. बता दें कि EVM मे कोई भी एनटीना या अन्य सेवा उपलब्ध नहीं है जो उसे बाहरी दुनिया से जोड़ सके

2. EVM मे सॉफ्टवेयर सिर्फ रीड ओन्ली होता है जिसे देखा पढ़ा जा सकता है मगर बदला नहीं जा सकता

3. EVM के कंट्रोल यूनिट मे सॉफ्टवेयर सिर्फ एक बार ही लोड किया जा सकता है

निष्कर्ष – यह बड़े शर्म की बात है कि राजनीति जो धर्म की कही जाती है आज इस मोड़ पर पहुंच चुकी है कि कई दल हारने के बाद मूर्खता भरे बयान देते हैं. उन्हें लोकतांत्रिक फैसले का आदर करना आना चाहिए

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